समाज कार्य विभाग द्वारा विश्व आत्महत्या निवारण दिवस पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

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बलिया । विश्व आत्महत्या निवारण दिवस के अवसर पर जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्याल के समाज कार्य विभाग द्वारा राजकीय महिला पॉलिटेक्निक में आईटी की छात्राओं के साथ एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन माननीय कुलपति प्रो. नरेंद्र शुक्ला के संरक्षण एवं समाज कार्य विभागाध्यक्ष डॉ. पुष्पा मिश्रा के दिशा-निर्देशन में किया गया।

कार्यशाला में समाज कार्य विभाग की सहायक आचार्य डॉ. रूबी द्वारा आत्महत्या से संबंधित विभिन्न आँकड़ों, युवाओं में आत्महत्या के प्रमुख कारणों तथा इसकी रोकथाम के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने विद्यार्थियों को मानसिक तनाव, परीक्षा एवं करियर संबंधी दबाव, सामाजिक एवं पारिवारिक परिस्थितियों तथा समय पर सहायता प्राप्त करने के महत्व के बारे में जागरूक किया।

इस अवसर पर राजकीय महिला पॉलिटेक्निक के प्रधानाचार्य डॉ. सुनील कुमार सोनकर ने कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों का निरंतर आयोजन होते रहना आवश्यक है, ताकि विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या की रोकथाम जैसे महत्वपूर्ण विषयों के प्रति संवेदनशील और जागरूक बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा इस प्रकार की पहल एक सराहनीय प्रयास है, जो विद्यार्थियों को अपनी समस्याओं को समझने, साझा करने और आवश्यकता पड़ने पर उचित सहायता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करती है। उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्राध्यापक डॉ. रिजवान हाशमी द्वारा सभी अतिथियों, वक्ताओं, छात्राओं एवं उपस्थित विद्यार्थियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया गया। उन्होंने इस प्रकार के कार्यक्रमों को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास एवं मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के लिए महत्वपूर्ण बताया।

कार्यशाला में आईटी विभाग की छात्राओं ने बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया तथा आत्महत्या की रोकथाम, मानसिक स्वास्थ्य और युवाओं के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों से संबंधित विषयों पर अपनी जिज्ञासाएँ एवं विचार साझा किए। कार्यक्रम में समाज कार्य विभाग के सहायक आचार्य डॉ संजीव कुमार एवं डॉ प्रेम भूषण यादव एवं छात्र-छात्राओं की भी सक्रिय उपस्थिति रही। कार्यशाला का उद्देश्य छात्राओं एवं युवाओं को आत्महत्या जैसे गंभीर सामाजिक एवं मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे के प्रति संवेदनशील बनाना तथा संकट की स्थिति में समय पर सहायता लेने और दूसरों को सहायता प्रदान करने के लिए प्रेरित करना रहा।

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