रेवती (बलिया)।जिले के स्वतंत्रता सेनानियों को वर्ष 1950 में नैनीताल (वर्तमान ऊधम सिंह नगर) में आवंटित कृषि भूमि की खोज और उस पर हुए कथित कब्जों को हटाने की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। मंगलवार को बलिया के सेनानी परिवारों के प्रतिनिधिमंडल ने ऊधम सिंह नगर के जिलाधिकारी प्रवीण सिंह भदौरिया से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपते हुए मामले की जांच में तेजी लाने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो बलिया के सेनानी परिवार आंदोलन का रास्ता अपनाने को विवश होंगे।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे पूर्वांचल जनता दल के अध्यक्ष भरत यादव ने बताया कि जिलाधिकारी ने पूरे प्रकरण में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की पहल पर वर्ष 1950 में स्वतंत्रता सेनानियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से तत्कालीन नैनीताल जनपद में कृषि भूमि आवंटित करने की योजना लागू की गई थी। उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत ने बलिया के उन सेनानियों की सूची तलब कराई थी,जो वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन सहित स्वतंत्रता संग्राम के दौरान विभिन्न आंदोलन में जेल गए थे।प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि तत्कालीन प्रशासनिक लापरवाही और स्थानीय स्तर पर बनाए गए भय के माहौल के कारण केवल लगभग 20 प्रतिशत स्वतंत्रता सेनानी ही अपनी भूमि पर कब्जा प्राप्त कर सके।
शेष भूमि पर वर्तमान में भू-माफियाओं का कब्जा है, जिसे उन्होंने अब तक का सबसे बड़ा भूमि घोटाला बताते हुए कहा कि इस संबंध में शीघ्र ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी मुलाकात कर विस्तृत प्रतिवेदन सौंपा जाएगा।प्रतिनिधिमंडल में अधिवक्ता प्रेम कुमार तिवारी, संजय सिंह, गुड्डू गुप्ता, अनिल कुमार सिंह, रमाशंकर पांडेय, संजय गुप्ता, संजय चौहान सहित कई सेनानी परिवारों के सदस्य मौजूद रहे।

