9 अगस्त के’बलिदान दिवस’ से पहले ऐतिहासिक क्रांति मैदान की बदहाल तस्वीर, मुख्य द्वार पर गंदगी और परिसर में कीचड़; विकास के दावों पर उठे सवाल
बलिया। अगस्त क्रांति और “बागी बलिया” की पहचान देशभर में गर्व के साथ ली जाती है।1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बलिया ने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती देकर स्वतंत्र प्रशासन स्थापित कर इतिहास रच दिया था।लेकिन उसी गौरवशाली इतिहास का साक्षी क्रांति मैदान(टाउन हॉल-बापू भवन)आज अपनी बदहाली की कहानी बयां कर रहा है।

9 अगस्त के अगस्त क्रांति दिवस और 19 अगस्त के बलिया बलिदान दिवस से पहले क्रांति मैदान की तस्वीर चिंताजनक है। मुख्य प्रवेश द्वार के सामने बजबजाती नाली से दुर्गंध उठ रही है, जबकि पूरे परिसर में जलभराव और कीचड़ पसरा हुआ है।यहां आने वाले लोगों को गंदगी के बीच होकर गुजरना पड़ रहा है।
विडंबना यह है कि इसी परिसर में समय-समय पर सरकारी कार्यक्रम,श्रद्धांजलि सभाएं,सांस्कृतिक आयोजन और प्रशासनिक बैठकें होती हैं। अधिकारी,जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठन भी यहां पहुंचते हैं, लेकिन मैदान की साफ-सफाई और जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी।
अगस्त का महीना शुरू हो चुका है। कुछ ही दिनों में स्वतंत्रता संग्राम के वीरों को श्रद्धांजलि देने के लिए मंच सजेंगे, भाषण होंगे और देशभक्ति के गीत गूंजेंगे। लेकिन सवाल यह है कि क्या क्रांति की इस ऐतिहासिक धरोहर को भी उसका सम्मान मिलेगा या फिर श्रद्धांजलि केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी?
स्थानीय लोगों का कहना है कि बलिया की पहचान केवल इतिहास की किताबों में नहीं, बल्कि इन स्मारकों और स्थलों में भी बसती है। यदि इन्हीं स्थानों की उपेक्षा होती रही तो विकास और विरासत संरक्षण के दावे खोखले साबित होंगे।
क्यों खास है बागी बलिया ?
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में बलिया ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ खुला विद्रोह किया था।
क्रांतिकारी नेता चित्तू पांडेय के नेतृत्व में यहां कुछ समय के लिए समानांतर राष्ट्रीय सरकार बनी थी।
इसी ऐतिहासिक घटना के कारण बलिया को पूरे देश में “बागी बलिया” के नाम से पहचान मिली।
हर वर्ष अगस्त माह में स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों को याद करते हुए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
जानिए, क्या है बलिया बलिदान दिवस ?
19 अगस्त को बलिया में बलिदान दिवस मनाया जाता है। यह दिन 1942 के स्वतंत्रता संग्राम के उन वीर सेनानियों की स्मृति को समर्पित है, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। इस अवसर पर प्रशासन, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठन शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
स्थानीय लोगों की मांग:
क्रांति मैदान की तत्काल सफाई कराई जाए।
जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।
मुख्य प्रवेश द्वार और परिसर का सौंदर्यीकरण कराया जाए।
स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े इस ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण के लिए विशेष योजना लागू की जाए।

