लालगंज (बलिया)। क्षेत्र के शिवपुर कपूर दियर गंगा घाट से सेमरिया डेरा तक लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से चल रहे बाढ़ सुरक्षा कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। बस्ती को गंगा कटान से बचाने के लिए बनाए जा रहे डैपनर (कटर) और पार्कोपाइन संरचना बारिश की पहली ही पानी की मार नहीं झेल सके। पूरब दिशा से बने दूसरे कटर का नोज (अग्र भाग) आधा कटकर गंगा में समाहित हो गया, वहीं उसके आसपास की खेतिहर भूमि का भी कटान हो गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ खंड द्वारा बस्ती की सुरक्षा के नाम पर मानकों की अनदेखी कर निर्माण कार्य कराया जा रहा है। उनका कहना है कि संबंधित विभाग ग्रामीणों की सुरक्षा के बजाय अपनी “झोली भरने” में लगा है और निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं।
शिवपुर कपूर दियर की सेमरिया डेरा बस्ती से गंगा कटान महज 20 मीटर की दूरी पर पहुंच चुका था। ऐसे में बस्ती की सुरक्षा के लिए लगभग 10 करोड़ रुपये की परियोजना के तहत 50-50 मीटर की दूरी पर 10 डैपनर (कटर) तथा बीच के करीब 300 मीटर क्षेत्र में पार्कोपाइन विधि से कार्य कराया जा रहा है। इस परियोजना का निर्माण कार्य अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह में शुरू हुआ था, जो अभी भी जारी है।
ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के दौरान मानकों की खुलेआम अनदेखी की गई। जेसीबी मशीन से पत्थरों को बिना उचित तकनीकी प्रक्रिया के नीचे गिराया जा रहा था और उसके ऊपर पत्थर भरकर जाल से बांध दिया जाता था। गुणवत्ता की अनदेखी का परिणाम यह रहा कि बारिश की पहली ही पानी में संरचना क्षतिग्रस्त हो गई।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जो ठोकर (कटर) बारिश के पानी के दबाव को भी नहीं झेल सका, वह गंगा में बाढ़ आने पर तटवर्ती बस्ती की सुरक्षा कैसे करेगा। बाढ़ सुरक्षा कार्य की इस स्थिति से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और उन्होंने निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

