वैदिक गणित, विज्ञान और संस्कृति का संगम; ज्ञान-विज्ञान मेले में रसड़ा प्रथम

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रसड़ा (बलिया)। नागाजी सरस्वती विद्या मंदिर, अखनपुरा, रसड़ा में देवरिया संकुल ज्ञान-विज्ञान मेले का आयोजन उत्साह एवं उमंग के साथ संपन्न हुआ। मेले में संकुल के घटक विद्यालय सरस्वती विद्या मंदिर रसड़ा, सरस्वती विद्या मंदिर देवरिया तथा सरस्वती विद्या मंदिर बेल्थरारोड के विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि गोरखपुर संभाग के संभाग निरीक्षक अजय दुबे, विशिष्ट अतिथि बलिया संभाग के संभाग निरीक्षक कन्हैया जी चौबे तथा अध्यक्ष बलिया विभाग के विभाग संचालक राम प्रताप सिंह रहे। अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अपने संबोधन में अजय दुबे ने कहा कि ज्ञान-विज्ञान मेले विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखारने तथा उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक चिंतन और नवाचार की भावना विकसित करने का सशक्त माध्यम हैं। कन्हैया जी चौबे ने भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर बल देते हुए विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने तथा ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वहीं, राम प्रताप सिंह ने कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करती हैं। मेले में वैदिक गणित के प्रश्नमंच, प्रयोग एवं पत्र वाचन, विज्ञान के प्रश्नमंच, प्रयोग, प्रदर्श एवं पत्र वाचन तथा संस्कृति ज्ञान के प्रश्नमंच, कथा कथन, आशु भाषण एवं मूर्ति कला लोक नृत्य की प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। विद्यार्थियों ने अपनी गणितीय दक्षता, वैज्ञानिक समझ, तार्किक क्षमता और रचनात्मकता का प्रभावशाली परिचय दिया। प्रतियोगिताओं में सरस्वती विद्या मंदिर रसड़ा ने 294 अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि सरस्वती विद्या मंदिर देवरिया 173 अंकों के साथ द्वितीय तथा सरस्वती विद्या मंदिर बेल्थरारोड 88 अंकों के साथ तृतीय स्थान पर रहा। समापन सत्र के मुख्य अतिथि छात्र शक्ति कंस्ट्रक्शन के डायरेक्टर रमेश सिंह ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि परिश्रम, अनुशासन और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति सफलता की आधारशिला हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा निखारने और लक्ष्य प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयासरत रहने की प्रेरणा दी।

प्रतियोगिताओं के निर्णायक के रूप में सुरेश बहादुर सिंह, विमलेश त्रिपाठी, महेंद्र वर्मा, दीपक गुप्ता, हरे कृष्णा यादव, विपिन पांडेय एवं रामनिवास सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सोनी सिंह ने किया, जबकि रणजीत सिंह ने आभार ज्ञापित किया। विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. राजेंद्र पांडेय ने अतिथियों, निर्णायकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सृजनात्मकता तथा भारतीय संस्कृति के प्रति गौरवबोध को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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