बांसडीह (बलिया)। सरयू नदी के भीषण कटान ने क्षेत्र के टीएस बंधा किनारे स्थित भोजपुरवा गांव में तबाही मचा दी है। कटान की रफ्तार इतनी तेज है कि लोगों के घर और खेत लगातार नदी में समाते जा रहे हैं। वर्षों से बसे परिवार अब नम आंखों से अपने ही पुश्तैनी मकानों को जेसीबी मशीनों से तुड़वाने को मजबूर हैं, ताकि दरवाजे, खिड़कियां, लकड़ी, सरिया और ईंटों जैसी उपयोगी सामग्री को सुरक्षित बचाया जा सके।
ग्रामीणों का कहना है कि जिन मकानों को कई पीढ़ियों की मेहनत और सपनों से बनाया गया था, वे अब कुछ ही घंटों में मलबे में तब्दील हो रहे हैं। सरयू की तेज धारा अब तक सैकड़ों बीघा कृषि भूमि को अपने आगोश में ले चुकी है और हर घंटे कटान का दायरा बढ़ता जा रहा है। इससे पूरे गांव में भय और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
गांव में जगह-जगह जेसीबी मशीनें चल रही हैं। कोई अपनी छत उतरवा रहा है, कोई दीवार गिरवा रहा है तो कोई मकान की ईंटें समेट रहा है। महिलाओं की आंखों में आंसू हैं, बच्चे सहमे हुए हैं और बुजुर्ग बेबसी से अपने उजड़ते आशियाने को निहार रहे हैं। कटान की जद में गांव की जल निगम की पानी की टंकी भी आ गई है, जो कभी भी ध्वस्त हो सकती है।
ग्रामीण हीरालाल यादव, भृगु यादव, जवाहिर यादव, राजेंद्र यादव, ललन यादव, जितेंद्र यादव, वीरेंद्र यादव, रविंद्र यादव, सतेंद्र यादव, गौतम यादव, मुन्ना, बलिराम यादव और श्रीकिशुन यादव ने बताया कि कई पीढ़ियों से उनका परिवार इस गांव में रह रहा है। उन्होंने कहा कि कभी कल्पना भी नहीं की थी कि अपने ही हाथों से जेसीबी लगवाकर अपना घर गिरवाना पड़ेगा। पहले खेत नदी में समा गए और अब मकान भी खत्म हो रहे हैं। फिलहाल लोग टीएस बंधा के किनारे जहां-तहां शरण लेने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस राहत नहीं मिली है।
वहीं, तहसीलदार नितिन कुमार सिंह ने बताया कि प्रशासन कटान प्रभावित क्षेत्र की लगातार निगरानी कर रहा है। राजस्व विभाग की टीम मौके पर मौजूद है और प्रभावित परिवारों का सर्वे कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के मकान कटान की जद में हैं, उन्हें शासन की मंशा के अनुरूप राहत एवं पुनर्वास योजना का लाभ दिया जाएगा तथा हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

