बलिया। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक डॉ. उत्कर्ष सिन्हा ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर जी का जीवन पत्रकारिता, विचार और राजनीति के बीच संवाद को महत्व देने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए प्रेरणा है। खासतौर से उन लोगों के लिए जो लोकतंत्र को केवल चुनावी हार-जीत नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व की प्रक्रिया मनाते हैं।
डॉ. उत्कर्ष सिन्हा साहित्यिक, सामाजिक व सांस्कृतिक संस्था संकल्प द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। श्री मुरली मनोहर टाउन डिग्री कॉलेज के राजेंद्र प्रसाद सभागार में मंगलवार को समकालीन राजनीति और चन्द्रशेखर विषयक विचार गोष्ठी आयोजित की गई थी। डॉ. उत्कर्ष ने कहा कि यह चिंता का विषय है कि समकालीन राजनीति में संसदीय परंपराएं, भाषा की मर्यादा और वैचारिक बहस दबाव में है। उन्होंने कहा, चन्द्रशेखर का राजनीतिक और संसदीय जीवन लोकतांत्रिक मूल्यों, वैचारिक प्रतिबद्धता और व्यक्तिगत साहस के तमाम दुर्लभ प्रसंगों से भरा हुआ है। उनका मानना था कि लोकतंत्र का मूल उद्देश्य आमजन की राजनीतिक हिस्सेदारी और उनकी समस्याओं से सीधा संवाद है, न कि केवल चुनावी गणित। चन्द्रशेखर ने कांग्रेस पार्टी में शीर्ष नेतृत्व में होते हुए भी इंदिरा गांधी द्वारा देश पर थोपे गए आपातकाल का खुला विरोध किया और जेल जाना स्वीकार किया। उन्होंने यह साहस ऐसे समय पर दिखाया, जब यह माना जाता था कि सत्ता विरोध का मतलब राजनीतिक भविष्य को संकट में डालना है। फिर भी उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा को प्राथमिकता दी। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि आपातकाल के विरोध ने चन्द्रशेखर को लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए खड़े होने वाले नेताओं की अग्रिम पंक्ति में ला खड़ा कर दिया, जिसे बाद में उनके संसदीय तेवरों में भी देखा गया।
प्रोफेसर जैनेन्द्र पांडेय ने कहा कि समकालीन राजनीति में चन्द्रशेखर जी जितना बड़ा आइकॉन नहीं। उनकी राजनीति में गांव, गरीबी और गांधीवाद का अनूठा सम्मिश्रण था। वह समाजवादी तो थे ही, इसके अलावा भी अन्य विचारधाराओं को पढ़ा था और उसकी अच्छाइयों को समाज के लिए जितना भी बन पड़ा दिया।
विचार व्यक्त करते हुए वरिष्ठ पत्रकार अशोक ने कहा कि जब कभी लोग यह महसूस करेंगे कि आजादी, समानता, इंसाफ और भाईचारे जैसी समस्याओं को झेल नहीं पा रहे होंगे और पूरा राजनीतिक माहौल भय और प्रलोभन से ग्रस्त होगा तब चन्द्रशेखर को एक आंदोलनकारी के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मूल समस्या मीडिया की आजादी को लेकर है। यदि वर्तमान राजनीति मीडिया को विमुक्त करने में सफल हो जाती है, तो देश की सोच उसमें निरंतर संवाद और एक कल्याणकारी राज्य की कल्पना को साकार करने में मदद भी मिल सकती है। चन्द्रशेखर की संयमित और स्वतंत्र अभिव्यक्ति के पैरोकार रहे।
विचारगोष्ठी की अध्यक्षता श्री मुरली मनोहर टाउन डिग्री कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दयालानंद राय ने की। संकल्प के सचिव आशीष त्रिवेदी ने अंगवस्त्रम और प्रतीक चिन्ह देकर वक्ताओं को सम्मानित किया। यूपी बैंक इम्प्लाइज यूनियन के नेता केएन उपाध्याय ने भी विचार व्यक्त किए। विचारगोष्ठी में पूर्व ब्लाक प्रमुख अनिल सिंह,जेपी सिंह, वरिष्ठ पत्रकार मनोरंजन सिंह, श्रमिक समन्वय समिति के अध्यक्ष अजय सिंह, महाविद्यालय शिक्षक संघ के नेता डॉ.अखिलेश राय,असगर अली, अजित सिंह, देव भृगुवंशी, लोकतंत्र सेनानी संगठन के संरक्षक चन्द्रशेखर सिंह, पत्रकार पंकज राय, पत्रकार गिरीश तिवारी, शिक्षक नेता सुशील पांडेय कान्हजी,डॉ.अशोक सिंह,माले नेता लक्ष्मण यादव,मोहन जी श्रीवास्तव, अमित सिंह, सचिन कुमार सिंह, अभिषेक पाठक, डॉ. कादम्बिनी, रंगमंच के कलाकार ट्विंकल गुप्ता, राहुल चौरसिया, ऋतिक गुप्ता,की उपस्थिति रही। संचालन वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश सिन्हा ने किया।

