रामसखा त्रिलोकी नाथ पांडेय की पांचवीं पुण्यतिथि पर अयोध्या में श्रद्धांजलि सभा,पुस्तक का हुआ विमोचन

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अयोध्या/ बलिया । श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े रहे और रामलला विराजमान के वाद में पक्षकार रहे स्वर्गीय त्रिलोकी नाथ पांडेय की पांचवीं पुण्यतिथि पर अयोध्या धाम में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं रामजन्मभूमि आंदोलन से जुड़े लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान त्रिलोकी नाथ पांडेय के जीवन और योगदान पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया गया।

रामलला के सखा के रूप में मिली पहचान

त्रिलोकी नाथ पांडेय को अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि विवाद के विधिक इतिहास में रामलला विराजमान के सखा के रूप में जाना जाता है। उन्होंने रामलला विराजमान के विधिक संरक्षक के रूप में मुकदमे की पैरवी से जुड़े दायित्वों का निर्वहन किया। श्रीराम जन्मभूमि मामले में लंबे समय तक चले न्यायिक संघर्ष के दौरान उन्होंने दस्तावेजों, साक्ष्यों और न्यायालयीन कार्यवाहियों से जुड़े कार्यों में योगदान दिया।

छात्र जीवन से संघ से जुड़े, जीवनभर निभाया दायित्व

स्वर्गीय त्रिलोकी नाथ पांडेय का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के दयाछपरा गांव में हुआ था। वे छात्र जीवन में ही वर्ष 1964 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और अपना जीवन संघ के कार्यों के लिए समर्पित कर दिया।

वर्ष 1984 में उन्हें विश्व हिंदू परिषद की संस्कृति रक्षा योजना के प्रांतीय प्रभारी के रूप में दायित्व मिला। इसके बाद वे रामजन्मभूमि आंदोलन से जुड़े विभिन्न कार्यों में सक्रिय रहे।

1992 में अयोध्या आए, 2008 में मिला महत्वपूर्ण दायित्व

रामजन्मभूमि आंदोलन के दौरान वर्ष 1992 में उन्हें मुकदमे की पैरवी से जुड़े कार्यों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिए अयोध्या बुलाया गया। रामलला विराजमान की ओर से दायर वाद में सेवानिवृत्त न्यायाधीश देवकी नंदन अग्रवाल ने रामलला के सखा के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बाद में यह दायित्व प्रोफेसर ठाकुर प्रसाद वर्मा ने संभाला।

वर्ष 2008 में प्रोफेसर वर्मा के स्वास्थ्य संबंधी कारणों से रामलला विराजमान के सखा के रूप में त्रिलोकी नाथ पांडेय ने यह जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद उन्होंने लंबे समय तक मामले से जुड़े दस्तावेजों, साक्ष्यों और न्यायालयीन प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई।

ऐतिहासिक फैसले के दौरान निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

श्रीराम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में सर्वोच्च न्यायालय की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 9 नवंबर 2019 को अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया। फैसले में विवादित भूमि पर रामलला विराजमान के पक्ष में मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट गठित करने का निर्देश दिया गया।

रामजन्मभूमि मामले से जुड़े लंबे न्यायिक संघर्ष में त्रिलोकी नाथ पांडेय की भूमिका को उनके सहयोगियों और आंदोलन से जुड़े लोगों द्वारा महत्वपूर्ण बताया जाता है।

24 सितंबर 2021 को हुआ निधन

दीर्घकालीन बीमारी के बाद त्रिलोकी नाथ पांडेय का 24 सितंबर 2021 को लखनऊ स्थित राम मनोहर लोहिया अस्पताल में निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार बलिया के पचरुखिया घाट पर राजकीय सम्मान के साथ किया गया।

उनकी पांचवीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने उनके जीवन, संगठनात्मक समर्पण और श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े उनके योगदान को याद किया तथा उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।

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