बाढ़-बारिश के दबाव में बैरिया-संसार टोला बंधा टूटा,पांच मीटर चौड़ा सुराख:सीसी सड़क हवा में लटकी

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एक माह पहले पाइपलाइन के पास रिसाव ने दी थी चेतावनी, करीब सात घंटे चला युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य;बढ़ते गंगा जलस्तर के बीच ग्रामीणों में दहशत

लालगंज (बलिया)। बाढ़ और मूसलाधार बारिश के दबाव के बीच बैरिया-संसार टोला बंधा गुरुवार सुबह अचानक टूट गया। सेमरिया ढाला से करीब पांच मीटर पूरब बंधे में लगभग चार से पांच मीटर चौड़ा सुराख बन गया। बंधे के आर-पार हुए इस कटाव के चलते ऊपर बनी सीसी सड़क का एक हिस्सा हवा में लटक गया। बंधा टूटने की खबर फैलते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया और मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई।

सूचना मिलते ही लालगंज चौकी प्रभारी हरीश यादव पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। सुरक्षा के मद्देनजर बंधे पर दोनों ओर से आवागमन करीब छह घंटे तक बाधित रहा। इसी बीच बाढ़ खंड के एसडीओ एसके प्रियदर्शी करीब आधा दर्जन अभियंताओं और कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंचे। बंधे को तत्काल बचाने के लिए युद्धस्तर पर राहत एवं मरम्मत कार्य शुरू कराया गया।

50 से अधिक मजदूरों ने संभाला मोर्चा

टूटे हिस्से को बचाने के लिए 50 से अधिक मजदूरों को दोनों तरफ लगाया गया। मजदूर प्लास्टिक की बोरियों में मिट्टी और ईंट के टुकड़े भरकर टूटे हिस्से में डालते रहे। दर्जनों ट्रैक्टरों से ईंट के टुकड़े मौके पर गिराए गए। वहीं, जेसीबी की मदद से बंधे के ऊपर हवा में लटक रही सीसी सड़क को तोड़कर उसके नीचे ईंट के टुकड़े, बालू और मिट्टी भरने का काम कराया गया। करीब सात घंटे की मशक्कत के बाद बंधे पर आवागमन शुरू कराया जा सका।

पाइपलाइन के आसपास पहले से हो रहा था रिसाव

बाढ़ खंड के अधिकारियों के अनुसार, हर घर नल-जल योजना के तहत जल निगम द्वारा बंधे में डाली गई पाइपलाइन के आसपास से पानी का रिसाव बंधे के लिए खतरे का कारण बना। अधिकारियों के मुताबिक पिछले माह हुई मूसलाधार बारिश के दौरान भी पाइप के आसपास तेज रिसाव हुआ था।

ग्रामीणों का कहना है कि उसी समय आशंका जताई गई थी कि यदि दोबारा बाढ़ आने के साथ तेज बारिश हुई और बंधे पर पानी का दबाव बढ़ा तो बंधा टूट सकता है। ग्रामीणों के अनुसार उस समय जल निगम और बाढ़ खंड की ओर से बालू की बोरियां डालकर तत्काल मरम्मत की गई थी, लेकिन रिसाव की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।

करीब एक माह बाद बाढ़ और बारिश के बढ़े दबाव के बीच बंधा टूटने के बाद ग्रामीणों की पुरानी आशंका सच साबित हो गई।

एसडीओ ने जल निगम पर लगाया आरोप, मुकदमे की बात

बंधा टूटने के कारणों के संबंध में बाढ़ खंड के एसडीओ एसके प्रियदर्शी ने कहा कि जल निगम द्वारा बिना अनुमति के बाढ़ और बारिश के समय बंधे को खोदकर पाइपलाइन डालना बंधा टूटने का मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जल निगम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।

पूर्व विधायक ने बचाव कार्य में की सहभागिता

बंधा टूटने की सूचना पर पूर्व विधायक सुरेंद्र नाथ सिंह भी सुबह मौके पर पहुंचे। उन्होंने बचाव कार्य को मजबूत और सुरक्षात्मक तरीके से करने का निर्देश दिया। साथ ही मौके पर चल रहे राहत कार्य में स्वयं सहभागिता करते हुए ईंट से भरी बोरियां उठाकर गड्ढे में डालीं।

बैरिया के सपा विधायक जय प्रकाश अंचल भी मौके पर पहुंचे और बाढ़ खंड के अधिकारियों तथा ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली। पूर्व मंत्री भरत सिंह और इंजीनियर दिनेश सिंह ने भी मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं।

बढ़ते गंगा जलस्तर के बीच मंडरा रहा बड़ा खतरा

बंधा टूटने के बाद अब बढ़ते गंगा जलस्तर ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मरम्मत किया गया हिस्सा बाढ़ के बढ़ते दबाव को नहीं झेल पाया और बंधा दोबारा टूटा तो मुरारपट्टी, बहुआरा, लालगंज नई बस्ती, शिवपुर, दलकी नंबर-1, सूर्यभानपुर, चौबे की दलकी, गोपालपुर समेत आसपास के कई गांवों में बाढ़ का गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

फिलहाल इन गांवों के लोगों की निगाहें बंधे की मरम्मत पर टिकी हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि केवल टूटे हिस्से की ऊपरी मरम्मत पर्याप्त नहीं होगी। पाइपलाइन वाले स्थान समेत बंधे के सभी कमजोर हिस्सों की तकनीकी जांच कर उन्हें स्थायी रूप से मजबूत किया जाना चाहिए।

ग्रामीणों की मांग-मरम्मत नहीं, बंधे की मजबूती की हो गारंटी

ग्रामीणों ने विभाग से मांग की है कि टूटे हिस्से को भरने के साथ ही पूरे संवेदनशील क्षेत्र की तकनीकी जांच कराई जाए। जल निगम की पाइपलाइन से जुड़े कमजोर स्थानों की भी जांच कर उन्हें सुरक्षित किया जाए, ताकि बाढ़ के चरम दबाव के समय बंधा दोबारा जवाब न दे।

फिलहाल बाढ़ खंड का पूरा अमला टूटे बंधे को बचाने में जुटा हुआ है। हालांकि गंगा के बढ़ते जलस्तर और लगातार बने बाढ़ के दबाव के बीच आने वाले घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं।

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