सेमरिया डेरा की बस्ती बचाने के लिए बने 10 डैपनर (कटर) में से दो क्षतिग्रस्त, ग्रामीणों में दहशत
लालगंज(बलिया)। शिवपुर कपूर दियर के गंगा घाट पर सेमरिया डेरा बस्ती को गंगा के कटान से बचाने के लिए 9.97 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए दस डैपनर (कटर) में से पहला नोज शनिवार को मस्का कटान की चपेट में आकर पूरी तरह ध्वस्त हो गया। इससे पहले तीसरे नंबर का नोज भी करीब दो माह पूर्व कटकर गिर गया था। करोड़ों रुपये की लागत से कराए गए कटानरोधी कार्य के क्षतिग्रस्त होने से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य शुरू होने के समय से ही मानकों की अनदेखी की जा रही थी।गंगा के तटवर्ती शिवपुर कपूर दियर के पूर्वी हिस्से में स्थित सेमरिया डेरा बस्ती पहले से ही कटान के खतरे की जद में थी। गंगा का कटान बस्ती से महज 15 से 20 मीटर की दूरी तक पहुंच गया था। इससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल बन गया था। बस्ती को सुरक्षित करने के लिए बाढ़ खंड विभाग की ओर से करीब 9.97 करोड़ रुपये की लागत से 800 मीटर लंबा कटानरोधी कार्य कराया गया। इसके तहत 50-50 मीटर की दूरी पर दस डैपनर (कटर) बनाए गए, जबकि 300 मीटर क्षेत्र में पार्कोपाइन लगाकर कटान रोकने का प्रयास किया गया।जानकारी के अनुसार, इस परियोजना का निर्माण जून के अंतिम सप्ताह में शुरू हुआ था, जो अगस्त तक लगातार चलता रहा। निर्माण के दौरान ही तेज बारिश के बीच तीसरे नंबर के नोज का अगला हिस्सा कटकर गिर गया था। अब शनिवार को पहले नोज के पूरी तरह ध्वस्त होने से परियोजना की मजबूती को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
निर्माण की गुणवत्ता पर पहले से उठ रहे थे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ खंड विभाग की ओर से कराए जा रहे इस कार्य पर शुरुआत से ही सवाल उठाए जा रहे थे। लोगों को आशंका थी कि यदि निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन नहीं हुआ तो कटान से बस्ती की सुरक्षा का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकेगा। अब दो नोज के क्षतिग्रस्त होने के बाद ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि कटानरोधी संरचनाएं ही सुरक्षित नहीं हैं, तो बस्ती को गंगा के कटान से किस तरह बचाया जा सकेगा।
ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने और क्षतिग्रस्त नोज की स्थिति का तकनीकी परीक्षण कराकर बस्ती की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।


