किसानों की उपजाऊ जमीन और पक्के मकान नदी में समाए, कटान रोकने की मांग को लेकर सुबह 7 बजे गांव से निकलेगी पदयात्रा
बांसडीह (बलिया)। सरयू नदी के लगातार हो रहे कटान से महाराजपुर गांव के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। कटान के चलते किसानों की उपजाऊ जमीन और पक्के मकान नदी में समाहित हो रहे हैं। इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने कटान रोकने की मांग को लेकर सोमवार, 2 नवंबर को पदयात्रा निकालकर बांसडीह तहसील मुख्यालय का अनिश्चितकालीन घेराव करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में पूर्व जिला पंचायत सदस्य नागेंद्र बहादुर सिंह झुन्नू ने उपजिलाधिकारी बांसडीह को पत्र देकर प्रस्तावित आंदोलन की सूचना दी है।
सुबह सात बजे गांव से निकलेगी पदयात्रा
नागेंद्र बहादुर सिंह झुन्नू ने बताया कि सोमवार सुबह सात बजे महाराजपुर गांव से पदयात्रा शुरू होगी। यह सहतवार होते हुए दोपहर 12 बजे बांसडीह तहसील मुख्यालय पहुंचेगी। इसके बाद ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर तहसील का अनिश्चितकालीन घेराव करेंगे।
उन्होंने कहा कि सरयू नदी के कटान से गांव की जमीन और मकानों को लगातार नुकसान पहुंच रहा है। इसके बावजूद अब तक कटान रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो गांव के अस्तित्व पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
स्थायी कटानरोधी उपाय और मुआवजे की मांग
रविवार को महाराजपुर गांव में ग्रामीणों की बैठक हुई। इसमें सरयू नदी के कटान से उत्पन्न स्थिति पर चिंता जताते हुए प्रशासन से तत्काल प्रभावी और स्थायी कटानरोधी उपाय करने की मांग की गई। साथ ही कटान से प्रभावित किसानों को उचित राहत और मुआवजा देने की मांग भी उठाई गई।
ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार शासन-प्रशासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकृष्ट करा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार हो रहे कटान से उनकी जमीन और आशियाने खतरे में हैं।
गांव को बचाने के लिए आंदोलन का सहारा
महाराजपुर के ग्रामीणों का कहना है कि सरयू नदी के कटान से बचाव के लिए अब निर्णायक पहल जरूरी हो गई है। गांव और किसानों की संपत्ति को बचाने के उद्देश्य से ग्रामीणों ने आंदोलन का रास्ता चुना है। उनकी प्रमुख मांग है कि कटान रोकने के लिए जल्द से जल्द स्थायी व्यवस्था की जाए और प्रभावित परिवारों को उचित राहत उपलब्ध कराई जाए।


