दुबहड़ (बलिया)। बलिया जनपद के दुबहड़ थाना क्षेत्र अंतर्गत मोहन छपरा गांव के निवासी एवं भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, पटना में कार्यरत प्रोफेसर दया सागर गुप्ता ने अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जगत में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर जिले का मान बढ़ाया है। उनका नाम लगातार दूसरे वर्ष 2025 और 2026 में विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकोंकी प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ड–एल्सेवियर सूची में शामिल हुआ है। इस उपलब्धि से उन्होंने अपने पैतृक गांव सहित पूरे बलिया जनपद को गौरवान्वित किया है।
मोहन छपरा निवासी श्री परशुराम प्रसाद एवं श्रीमती कलावती देवी के पुत्र प्रोफेसर दया सागर गुप्ता ने राजकीय इंटर कॉलेज, बलिया से हाईस्कूल तथा टाउन इंटर कॉलेज, बलिया से इंटरमीडिएट की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उत्तर प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय से बीटेक तथा प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (भारतीय खनि विद्यापीठ), धनबाद से एमटेक एवं पीएचडी की उपाधियां प्राप्त कीं।
प्रोफेसर गुप्ता ने लोकनायक जयप्रकाश प्रौद्योगिकी संस्थान, छपरा; शेरशाह इंजीनियरिंग कॉलेज, सासाराम; संत लोंगोवाल अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, पंजाब; राजीव गांधी पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी संस्थान, अमेठी तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मंडी (हिमाचल प्रदेश) जैसे दो प्रतिष्ठित संस्थानों में शिक्षण एवं अनुसंधान कार्य किया है। वर्तमान में वे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, पटना में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।
उनका प्रमुख शोध क्षेत्र साइबर सुरक्षा, क्वांटम युग के लिए सुरक्षित कूटलेखन तकनीक, ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी तथा सुरक्षित डिजिटल संचार है। उनके अनेक शोधपत्र प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। लगातार दो वर्षों तक इस प्रतिष्ठित सूची में स्थान प्राप्त करना प्रोफेसर गुप्ता के उत्कृष्ट शोध योगदान और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय में उनकी पहचान को दर्शाता है।
बलिया के छोटे से गांव मोहन छपरा से निकलकर देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों तक पहुंचना और विश्व के शीर्ष वैज्ञानिकों की सूची में लगातार स्थान बनाना क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि ग्रामीण परिवेश के विद्यार्थी भी अपनी प्रतिभा, कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान स्थापित कर सकते हैं।
प्रोफेसर दया सागर गुप्ता की यह उपलब्धि उनके परिवार, पैतृक गांव मोहन छपरा तथा पूरे बलिया जनपद के लिए गर्व और गौरव का विषय है।


