लालगंज(बलिया) । प्रातः स्मरणीय परम पूज्य गोलोकवासी श्री श्री 1008 शिव स्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज की वार्षिक पुण्यतिथि रविवार को मुरारपट्टी मठिया पर श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में श्री श्री 1008 स्वामी रामभद्र करपात्री जी महाराज उर्फ बालक बाबा की उपस्थिति में पं. सुभाष उपाध्याय ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन-अर्चन कराया। इसके बाद भव्य आरती हुई। श्रद्धालुओं ने संत शिव स्वरूप ब्रह्मचारी जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। इसके बाद प्रसाद वितरण के साथ भंडारा शुरू हुआ,जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
बताया गया कि बारम्बारी गऊघाट, कौशांबी में यमुना तट पर स्थित दामोदर आश्रम के महान तपस्वी संत शिव स्वरूप ब्रह्मचारी जी ने इसे अपनी तपोस्थली बनाया था। चित्रकूट, बांदा, बलिया सहित उत्तर प्रदेश और बिहार के सैकड़ों गांवों में उनके लाखों श्रद्धालु रहे हैं। वह जहां भी जाते, भक्तों के बीच आध्यात्मिक वातावरण बना देते थे। उनके सानिध्य में आने वाला व्यक्ति उनका भक्त बन जाता था। यही कारण है कि आज भी उनके अनुयायियों के बीच उनके प्रति श्रद्धा और विश्वास कायम है।
संत शिव स्वरूप ब्रह्मचारी जी प्रत्येक वर्ष मुरारपट्टी मठिया में तीन से चार माह तक श्रद्धालुओं के बीच रहकर भजन-कीर्तन और प्रवचन करते थे। इस दौरान क्षेत्र के दर्जनों गांवों से श्रद्धालु मठिया पहुंचते और भक्ति की धारा में सराबोर होते थे।
इस अवसर पर श्री श्री 1008 स्वामी रामभद्र करपात्री जी महाराज उर्फ बालक बाबा ने कहा कि महान संतों, साधु-सन्यासियों, तपस्वियों और विभूतियों का जन्मदिवस ही नहीं, बल्कि उनकी पुण्यतिथि भी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जानी चाहिए। उनके जीवन और विचारों से प्रेरणा लेकर समाज को भक्ति, सेवा और सद्भाव की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
बालक बाबा ने गजेंन्द्र मोक्ष की कथा पर प्रकाश ड़ालते हुये कहाँ कि “अहंकार और अपनी शक्ति पर अत्यधिक भरोसा करने के बजाय संकट में ईश्वर की शरण और सच्ची भक्ति मनुष्य को शक्ति देती है।” गजेंद्र की पुकार में दिखावा नहीं था, इसलिए भगवान ने उसकी रक्षा की।
इसी कारण “गजेंद्र मोक्ष” को भगवान की शरणागति और भक्त की पुकार पर ईश्वर की कृपा का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है।
शिव स्वरूप ब्रह्मचारी की पुण्यतिथि पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब मुरारपट्टी मठिया में पूजन-अर्चन,पुष्पांजलि और भंडारे का आयोजन


