बलिया । पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया के पं. दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ द्वारा आज जयप्रकाश नारायण सभागार में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के संरक्षक और अध्यक्ष माननीय कुलपति प्रो. नरेन्द्र कुमार शुक्ल ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में दीन दयाल जी के जीवन दर्शन को प्रस्तुत किया। बताया कि दीनदयाल जी का एकात्म मानववाद और अंत्योदय का सिद्धांत ही आज सरकार की हर योजना जनधन, उज्ज्वला, आयुष्मान और किसान सम्मान निधि आदि का आधार है। जब अंतिम व्यक्ति का उदय होगा, तभी विकसित भारत का सपना पूरा होगा। विशिष्ट अतिथि प्रो. शैलेश कुमार मिश्र, सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी ने समकालीन विश्व में एकात्म मानववाद की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पश्चिमी विकास मॉडल ने भौतिक उन्नति तो दी, पर मानसिक अशांति भी दी। दीनदयाल जी का मॉडल समावेशी विकास, सशक्त समाज और नैतिक राजनीति का मार्ग दिखाता है। विशिष्ट अतिथि डॉ. जगदीश सिंह दीक्षित, महासचिव, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, उ.प्र. ने कहा कि अंत्योदय का विचार केवल अर्थशास्त्र नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद का सांस्कृतिक दर्शन है। शोधपीठ के निदेशक प्रो. बब्बन राम ने दीनदयाल जी के जीवन संघर्ष को प्रस्तुत किया। दीप प्रज्वलन एवं पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के चित्र पर माल्यार्पण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। विषय प्रवर्तन डॉ. रामसरन यादव ने किया। डॉ. अनुराधा राय, सह निदेशक ने संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अभिषेक मिश्र ने किया। कार्यक्रम में डॉ. पुष्पा मिश्रा, प्रो. अशोक सिंह, डॉ. रजनी चौबे आदि विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
जेएनसीयू में दीन दयाल उपाध्याय जयंती का आयोजन


